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एक साथ करो कई काम


बातचीत करते हुए खाना बनाना, ऑनलाइन चैटिंग करते हुए सिनेमा देखना- ये आदतें सब में होती हैं। किसी में कम तो किसी में ज्यादा। इसे मल्टिटास्किंग कहते हैं। इसकी क्षमता उम्र बढ़ने के साथ-साथ घटने लगती है। एक काम करते हुए दूसरे काम पर ध्यान देना आसान नहीं रहता।

अब वैज्ञानिकों ने दिमाग के उस हिस्से को पहचान लिया है, जो एक साथ कई काम करने की इजाजत देता है। यूनिवर्सिटी ऑफ मांट्रियल में हुई एक रिसर्च में यह पाया गया है कि दिमाग के उस हिस्से को कॉग्निटिव स्टिमुलेशन प्रोग्राम की सहायता से पहले की तरह थोड़ा चुस्त-दुरुस्त बनाया जा सकता है। इस रिसर्च के प्रमुख सिल्वी बी के मुताबिक, ऐसे अभ्यास में दिमाग के उस खास हिस्से को सक्रिय करने की कोशिशें की जाती हैं।

ऐसी कोशिशों में सीनियर सिटिजंस को दिमागी लचीलेपन और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता का अभ्यास करवाया जाता है। ध्यान केंद्रित करने के लगातार अभ्यास के बाद यह पाया गया कि दिमाग की एक साथ कई काम करने की क्षमता बढ़ी। ऐसी प्रैक्टिस में दिए गए दो कामों में से एक काम को 80 प्रतिशत और दूसरे काम को 20 प्रतिशत अटेंशन देना होता है।

फिर 80:20 के अनुपात को 50:50 करना होता है। और अंत में दिमागी अटेंशन का यह अनुपात 20:80 हो जाता है। ऐेसे अभ्यास से दिमाग के बीच का प्रिफ्रंटल एरिया अपना काम ज्यादा सुचारू ढंग से करने लगता है। गौरतलब है कि प्रिफंटल एरिया ही मल्टिटास्किंग के लिए जिम्मेवार होता है।


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