मित्रो, हमारा यह जीवन अनमोल है।
ईश्वर द्वारा मानव जाति को दी गई एक अमूल्य भेंट है। ज़रा बताईए तो आज सुबह
उठकर क्या आपने चहचहाती चिड़ियों की आवाज़ सुनकर आराम से चाय पी, या फिर चाय
पीते हुए भी आप दिन भर के कामों को निपटाने की रूपरेखा बना रहे थे?
संभावना यह है कि आप बीते हुए व आने वाले दिनों के बारे में उसी समय सोच
रहे थे। चाय की प्याली कब ख़त्म हुई; पता ही नहीं चला।
यह
चिंताएं / टेंशन या स्ट्रेस धीरे धीरे आगे चलकर डिप्रेशन का रूप धारण कर
अनेक लोगों को मनोरोगी बना रही हैं। हर व्यक्ति के जीवन में प्रतिदिन
तरह-तरह की परेशानियां आती हैं, जिनका हल उसे खुद ढूंढना होता है। टेंशन
कुछ हद तक ज़रूरी भी है। यह वॉयलिन के तार की तरह है जिसे अगर बहुत ज्यादा
कस दें तो वह टूट जाएगा और अगर ढीला छोड़ दोगे तो वॉयलिन बजेगा ही नहीं। इसी
तरह बहुत अधिक टेंशन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है।
स्ट्रेस/टेंशन को ऐसे नापें–
- क्या छोटी छोटी बातें आपको परेशान करती हैं?
- क्या आपको रात में देर तक नींद नहीं आती?
- क्या सुबह उठते समय आपको लगता है कि आप सोये ही नहीं?
- क्या आप बहुत अधिक परेशान रहते हैं?
- क्या आपको लगता है कि आप फंस गए हैं और बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं है?
- क्या आपको हर बात पर अपने आस-पास के लोगों से शिकायत होती है?
- क्या आप सब पर बेवजह नाराज़ होते हैं?
- यदि इनमे से किसी एक प्रश्न का भी उत्तर हां है तो समझिए की स्थिति गंभीर है अब इस स्ट्रेस से छुटकारा पाने का सही समय आ गया है।
स्ट्रेस / टेंशन के कारण–
इसकी कई
वजह हैं; हालंकि हर वजह हर व्यक्ति को परेशान नहीं करती। चिंताओं से जूझने
की हर इंसान की क्षमता अलग होती है। स्ट्रेस के कुछ कारण हैं–
1- सफलता पाने की जल्दबाजी
2- अव्यवहारिक व कुछ ज्यादा ही ऊंचे उद्देश्य होना
3- परिवारजनों से नोंकझोंक
4- सभी को खुश करने की आदत
5- बहुत अधिक काम होना
6- आत्मविश्वास की कमी
7- उद्देश्यहीन जीवन होना
8- बीती हुई बातों की चिंता करना
9- असुरक्षित भविष्य की चिंता
स्ट्रेस से होने वाली बीमारियां–
मानसिक परेशानियों का सबसे बुरा असर शरीर पर पड़ता है। इससे कई बीमारियां होती हैं जैसे–
1- हाई ब्लड प्रेशर
2- पेप्टिक अलसर
3- अपच, पेट में गैस
4- कॉन्स्टीपेशन
5- कोलाइटिस, डायरिया
6- मालन्यूट्रिशन
7- अनिद्रा
8- सिर दर्द, एकाग्रता की कमी
9- अस्थमा
10- टैकीकॉर्डिया, हार्ट अटैक
11- कुछ त्वचा रोग
12- भोजन में अनिच्छा से वजन में कमी
13- कुछ लोग चिंताओं से दूर भागने के लिए अधिक भोजन करते हैं इससे वजन ज़रुरत से ज्यादा बढ़ता है
बचाव के उपाय–
हमारे पास
ऐसे अनेक रोगी आते हैं जो किसी न किसी कारण से स्ट्रेस या तनाव में हैं।
उनमें से काफी इतने परेशान रहते हैं कि मनोचिकित्सक से मिलकर भी अनेकों
दवाएं खाने के बाद भी परेशानी बढ़ती ही जाती है जिससे स्वयं के अलावा परिवार
भी परेशान होने लगता है। किसी किसी केस में तो पारिवारिक कलह के कारण
परिवार टूटने तक की नौबत आ जाती है।
ऐसे
मामलों में परामर्श के बाद उचित आयुष उपचार के साथ साथ जो ज़रूरी टिप्स
उन्हें बताते हैं उनमें से कुछ साधारण लेकिन अत्यंत शक्तिशाली और सफल टिप्स
जिनसे अनेकों रोगियों ने लाभ लिया है, वह जनहित में आपको बताए जा रहे हैं।
आप भी इन्हें अपनाएं और लाभ होने पर हमें भी बताएं-
1-
सबसे पहले तो हर बात का सकारात्मक पहलू देखें। यह विश्वास रखें की जीवन
में जो हो रहा है वह हमारे साथ न होकर हमारे लिए हो रहा है।
2- अपने उद्देश्य निर्धारित करें और उन्हें पाने के लिए व्यवहारिक प्लान्स बनाएं। सपनों की दुनिया में न जिएं। बहुत अधिक अपेक्षायें न रखें न तो खुद से न दूसरों से। गलती कोई भी कर सकता है, हर बात को दिल से न लगाएं।
3-
नकारात्मक सोच वाले लोगों से दूर रहें। किसी भी बात या काम के कई मतलब
निकाले जा सकते हैं। उनमें से जो सबसे अच्छा हो वही अपनाएं बाकी सब छोड़
दें।
4- खुल कर हंसिए। अपने साथ किए गए मज़ाक को मज़ाक की तरह ही लें। ज्यादा गंभीर होने की ज़रुरत नहीं है।
5- नियमित 2-3 किमी टहलें और 20-25 मिनट व्यायाम करें।
6- फ़ास्ट फ़ूड जैसे चाउमीन, बर्गर, पिज़्ज़ा, मैक्रोनी आदि से दूर रहें।
7- भोजन में फलों व पानी की मात्रा बढ़ाइए।
8- अपने शौक पूरे करिए जैसे – संगीत सीखना, पौधे उगाना, पेंटिंग, ड्राइविंग, तैराकी करना।
9- घर और बाहर के काम आपस में बांट लीजिए। सारे काम खुद करने की जिद न करें।
10- यह
याद रखें की आप सबको खुश नहीं रख सकते। सही काम करें और अगर उससे सब लोग
खुश नहीं होते तो चिंता न करें। धीरे-धीरे सब आपको समझ जाएंगे।
11- हर काम को जल्दी निपटाना है लेकिन अगर सबमें 5 मिनट और दे दिए जाएं तो काम करते समय जल्दबाजी नहीं होगी।
12- हर
दिन सिर्फ 10 मिनट ईश्वर की बनायी हुई प्रकृति को अवश्य निहारें। यह ईश्वर
का दिया हुआ उपहार है। आकाश के बादल, ठंडी हवाएं, खिलते हुए फूल, चहचहाती
चिड़िया, खेलती हुई गिलहरियां यह सब आपके लिए ही बनाई गई हैं।
13- खुद को पीड़ित समझना छोड़ दें।
यह जान
लीजिए की किसी कपडे को तैयार करने के लिए काले धागे भी उतने ही ज़रूरी होते
हैं जितने कि रंगीन धागे। परेशानियां सबके पास हैं सिर्फ आपके पास नहीं।
अपना नजरिया बदलें; नज़ारे अपने आप बदल जाएंगे। अपने जीवन की बागडोर अपने
हाथ में लीजिए। परेशानियों से निपटने के लिए निश्चित रूपरेखा बनाइए और आगे
बढ़िए। आपके सुखद जीवन की कल्पना साकार हो इन्ही शुभकामनाओं के साथ !!
“चिंतन करिए चिंता नहीं”
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सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः ।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत् ॥
डॉ.स्वास्तिक
चिकित्सा अधिकारी
(आयुष विभाग, उत्तराखंड शासन)
(ये सूचना सिर्फ आपके ज्ञानवर्धन हेतु है। किसी भी गंभीर रोग से पीड़ित होने पर चिकित्सक के परामर्श के बाद अथवा लेखक के परामर्श के बाद ही कोई दवा लें। लेखक से drswastikjain@hotmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।)


