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चुनावी व्यंग


दागी, बागी, बाहरी, लगा रहे हैं जोर
सारे अपनी जीत का मचा रहे हैं शोर
मचा रहे हैं शोर सड़क पर फिरें अकड़ते
मगर गली में मतदाता के पांव पकड़ते
दिव्यदृष्टि पाने को आतुर विजय सुहागी
लगा रहे हैं जोर बाहरी, बागी, दागी


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