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नाकामियों का प्रतीक साबित हुआ चौकीदार

नाकामियों का प्रतीक साबित हुआ चौकीदार

आईये देखते हैं मोदी जो खुद को चौकीदार बताते है के प्रधानमंत्री बनने के बाद क्या-क्या मुमकिन हो गया जो पहले नामुमकिन था।

कुछ तथ्य...

- बेरोजगारी दर 45 वर्षों में उच्चतम 
स्तर पर (NSSO का आंकड़ा)

– दुनिया के 10 सर्वाधिक प्रदूषित शहर अब भारत में (WHO का आंकड़ा)

- 30 वर्षों में सबसे अधिक सैनिक शहीद हुए (वाशिंगटन पोस्ट)

- 80 वर्षों में भारत में सबसे अधिक आय असमानता (क्रेडिट सुइस रिपोर्ट)

- भारत महिलाओं के लिए दुनिया का सबसे ख़तरनाक देश बना (थॉमस रॉयटर्स सर्वे)

- 10 वर्षों में सबसे ज्यादा कश्मीरी नौजवान उग्रवाद की तरफ़ गये (सरकारी आंकड़ा)

- 18 वर्षों में किसानों के लिए सबसे खराब कीमत (WPI आंकड़ा)

- अब तक की सर्वाधिक गाय संबंधी हिंसा और मॉब लिंचिंग का रिकॉर्ड (इंडिया स्पेंड आंकड़ा)

- भारत विश्व का दूसरा सबसे अधिक विषमता वाला देश बना (ग्लोबल वेल्थ रिपोर्ट)

- भारतीय रुपया एशिया की सबसे खराब प्रदर्शन वाली मुद्रा बना (बाज़ार आंकड़ा)

- भारत पर्यावरण संरक्षण में विश्व का तीसरा सबसे बुरा देश बना (EPI 2018)

- भारत के इतिहास में पहली बार विदेशी धन और भ्रष्टाचार को वैधता प्राप्त हुई (वित्त विधेयक 2017)

- 70 वर्षों में सबसे कम जवाबदेह प्रधानमंत्री (0 प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले प्रथम प्रधानमंत्री)

- भारत के इतिहास में पहली बार CBI बनाम CBI, RBI बनाम सरकार का टकराव

- भारत के इतिहास में पहली बार सुप्रीम कोर्ट के 4 न्यायाधीशों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि लोकतंत्र खतरे में है

- भारत के इतिहास में पहली बार रक्षा मंत्रालय के कार्यालय से चोरी हो गये शीर्ष गोपनीय रक्षा दस्तावेज (राफाल)

- 70 वर्षों में पहली बार असहिष्णुता और धार्मिक अतिवाद इस स्तर पर (व्यक्तिगत अवलोकन)

- भारतीय मीडिया 70 वर्षों में सबसे बदतरीन स्थिति में (व्यक्तिगत अवलोकन)

- भारत के इतिहास में पहली बार हुआ है कि सरकार की आलोचना करने वालों को राष्ट्रविरोधी करार दिया जा रहा है (व्यक्तिगत अवलोकन)

ये आंकड़े देख कर साफ है देश पिछले 5 सालों में काफी पीछे गया है इसलिये देश को ऐसे बड़बोले चौकीदार की नही काबिल प्रधानमंत्री की आवश्यकता है,क्योकि काबिल/योग्य इंसान ही इस देश को आगे ले जा सकता है। महापरिवर्तन जरूरी है।


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